देव बूढ़ा बनोगी सेहली का इतिहास :
(16 वीं शताब्दी मे राजा सिद्धसेन ने देव बूढ़ा बनोगी का मंदिर बनाया था।)
देव बुढा बनोगी का मन्दिर जिला मंडी हि०प्र० के मुख्यालय से लगभग 15 कि.मी दूर है। इस देव का नया मन्दिर 1992 ई० को स्थानीय जनता के सहयोग से बनाया गया। माना जाता है कि यह देश बनोगी नाम के गांव से लगभग 5000 वर्ष पहले सेहली गांव में आया था। जिस जगह पर इस देव का मन्दिर है वहां पर पहले बहुत ही घने व बड़े पेड़ हुआ करते थे। पहले उस जगह पर कोई भी व्यक्ति अकेला नहीं जा सकता था। वहां पर सवसे पहले देवता ने पेड़ के ऊपर अपना बसेरा बनाया था। धीरे धीरे लोगों को देवता के बारे में ज्ञान होने लगा! बहुत से लोगों को देवता ने स्वप्न में भी इस बार में जानकारी दी। एक किवदन्ती के अनुसार देव बढ़ा बनोगी का प्राचीन मन्दिर मण्डी रियासत के राजा सिद्ध सेन ने बनाया था। राजा सिद्ध सेन 16वीं शताब्दी में अपनी प्रजा व सेना को आदेश दिए थे कि जहाँ कहीं भी जिस भी देवता के अवशेष या पुराने मन्दिर है। वहां पर नए मन्दिर बनाए जाए। राजा सिद्ध सेन मंडी के इतिहास में अपने राज्य के विस्तार एवं अनेक मन्दिरों व मूर्तियों के निर्माण के लिए ख्यात रहे है। गांव सेहली में देव बढ़ा बनोगी के मन्दिर के साथ एक बहुत ही बड़ा सिम्बल का पेड़ था। देवता उसके ऊपर ही विराजमान रहता था। मन्दिर में एक पत्थर की मूर्ति है। यह भी मान्यता है कि यह पत्थर की मूर्ति हजारों वर्ष पहले से है। अब पुराने मन्दिर को गिराकर नया मन्दिर बनाया गया है। बहुत से बड़े-बड़े पेड़ मंदिर परिसर से काट दिए गए है। जिससे देवता खश नहीं है तथा कई बार उसका दष्टांक अपने कार करिन्दों को व हार के लोगों को दे चुके है।
देवता के उत्तव एवं मेल
देबीके मन्दिर में वर्ष में दो गए उत्सवों का आयोजन होता है। बैसाव्य माह की अन्तिम तिमी को देव बूढ़ा बनोगी की करंडी ( मोहन ) रात 11 बजे मला बगलामुखी के मन्दिर से अपने मन्दिर को जाती है। माता बगलामुखी के मन्दिर में भी देख का अपना स्थान है। देवता की हार के सभी लोग इसमें शामिल होते है- गाजे बाजे के साथ हैवटा पहले अपने भन्डार में जाता है जहां उसकी पूजा होती है उसके बाद वहां से भी अपना निशान लेकर अपने मन्दिर में जाता है। जब डीक 12 बजे देवता अपने मन्दिर में कराड़ी एवं मोहरा कि देता है। उसके बाद देखा का गुर खेलता है। देवता के के साथ कुछ हरनाट भी देवता के खेलते है। देल खेल समाप्त होने के बाद सारी रात देवता के मन्दिर में भजन फिर्तन होता है।अगली वह ज्येक माह की प्रथम तारीख को देवता का मेला बडे हर्बोल्लास के साथ मनाया जाता है। सभी और गरीब लोग इस मेले में भाग लेते हैं। टेकला के कारदारों का इस मेले में शामिल होना आवश्यक माना गया है। मेले में दुकानों का भी प्रबन्ध होता है पल्ट अधिकतर भोड मिगई बालों दुकान पर ही होती है। सारा दिन लोगों का आना-जाना रहता है। इस मेले में सभी लोग अपने देवता को रो की को चढ़ाते हैं। चार बजे देवता का गुरु खेलता है तथा देखानी के द्वारा लोगों की स्थिलों के बारे में अवगत करवाती है। इसके बाद जोगनीयों के पादरे के पास वाली दी जाती है। कहाँ जाता है कि यह बाल "जोगनोयों को दी जाती है। शाम को देव बढ़ा बनोगी की करंडी ( मोहरा) फिर अपने स्थान पर वादिस चली जाती है। जहाँ से आई थी
एक मेला पच भिख्मों पचा ( कार्तिक मास ) को होता है। ● पंच भिखमी पन्या को रात को देन बढ़ा बनोगी का मन्दिर पूरी तरह दहन की तरह सजा होता है। इस रात को लगभग 9बजे मातीन देल खेलता है तथा देवता के आगमन की जानकारी देता है। उसके बाद देव बढ़ा बनोगी मन्दिर के दात बाउंडा का आयोजन होता है। पहले यह बाठंडा देवी राम शर्मा एक पार्टी करती
लेकिन अब बाउंडा दीप कुमार शर्मा एड पास करती है। यह प्रथा प्रचलित है। सारी रात लोग देवता के मन्दिर, । अमा में गुजारते हैं। दुकाने रात से ही लगना आरम्भ हो जाती है। दूसरे दिन मन्दिर में भोर का भी आयोजन होता है हजारों लोग प्रसाद प्राप्त करते है। कुछ अन्य देशैं- देवताओं को भी इस मेले के लिए बालारा जाता है। देर मिलन के बाद सभी देगे देवता अपने अपने देव ध्यान पर बैठ जाते हैं। उन्हें कमेटी के द्वारा भेटे दी जाती है। दोपहर बाद सभी देवी-देवताओं को भोग
लगाया जाता है तथा उसके बाद देऊल काम का आनंद लेते हो मेले की समाप्ति पर सभी मेहमान देव बढ़ा बनेगी देव से मिलते है। और उसके बाद अपने- अपने मन्दिरों को गपिस चले जाते है। देवता की मान्यता
देवता के हार के लोगों को अपने देवता के ऊपर पूर्ण आल्या है। जब भी किसी के घर में कोई सबसे पहले अपने देवता को निमन्त्रण देते है तथा प्रार्थना करते है शुभ कार्य हो तो कि उनका कार्य खशी खगी नियह जाए। बच्चों की शादी होने पर देवता को जातर दी जाती है ताकि नए नेवले पति-पत्नी की जीवन अच्छा व्यतीत हो व देवता की कृपा हमेशा उनके ऊपर बनी है लोगों को अपने देवता के ऊपर से भी अक्षा आख्या है कि जात अकाल पडे या भारी तुफान, बाद आदी आए तो देवता हो उसका समाधान करेगा | हसे कई प्रमाण लोगों को अपनी J आखों के सामने मिले हैं। लोगों को देवता के प्रति आगाढ़ आख्या व मान्यता है।
बढ़ा बनोगी की हार जेल का आना है कि जब मोगला में आई तो मो ने अपने भाई देव बढ़ा बनोगी से अपनी हार में स्थान देने के लिए यहा! देव बढ़ा बन नरोगी ने तनिक भी देर नहीं की और अपनी बहन मां कालामुखी को अपने ही घर व्यानि मन्दिर में मां के लिए जगह दे दी। तब से लेकर आज दिन तक जब माता कभी भ्रमण को जाती हैं। तो माँ का भाई देव बढा- बनोगी भी साथ जाता लोगों को अपने दोनों देवी देवता के ऊपर पूर्ण सिळलाले व आया है जिस कारण हजारों लोग वर्ष भर दर्शन करते रहते हैं।

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